गुलज़ार के नाम ।
अगर तलाश करूं कोई मिल ही जायेगा,
मगर हमारी तरह कौन तुमको चाहेगा।
तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा,
मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा।
मैं अपनी राह में दीवार बन के बैठा हूँ,
अगर वो आया तो किस रास्ते से आएगा।
तुम्हारे साथ ये मौसम फरिश्तों जैसा है,
तुम्हारे बाद ये मौसम बहुत सताएगा।
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